अब फाइलों में नहीं दबेगी पदोन्नति!” — DPI के सख्त आदेश से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, 30 जून तक हर हाल में पूरी करनी होगी प्रमोशन प्रक्रिया

“अब फाइलों में नहीं दबेगी पदोन्नति!” — DPI के सख्त आदेश से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप, 30 जून तक हर हाल में पूरी करनी होगी प्रमोशन प्रक्रिया
रायपुर छत्तीसगढ़ _लोक शिक्षण संचालनालय ने प्रदेश के शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही ढिलाई, अव्यवस्था और लंबित पदोन्नति मामलों पर आखिरकार बड़ा प्रशासनिक डंडा चला दिया है। शिक्षक और लिपिक संवर्ग में खाली पड़े हजारों पदों, गड़बड़ आंकड़ों और अटकी प्रमोशन फाइलों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच DPI ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने आदेश दिया है कि 30 जून 2026 तक हर हाल में पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए और कोई भी प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए।
15 मई 2026 को जारी इस आदेश के बाद प्रदेशभर के शिक्षा कार्यालयों में हलचल तेज हो गई है। वर्षों से धूल खा रही फाइलें अब अचानक बाहर निकलने लगी हैं और कई जिलों में अधिकारियों की बैठकों का दौर शुरू हो गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो DPI को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई जिलों में शिक्षक संवर्ग और लिपिक वर्ग के वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी छिपाई जा रही है, जबकि पात्र कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में जानबूझकर पदक्रम सूची अपडेट नहीं की गई, आरक्षण रोस्टर का पालन अधूरा रखा गया और यू-डाइस डाटा तक सही तरीके से अपडेट नहीं किया गया। इसका सीधा असर शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रमोशन पर पड़ा। कई शिक्षक ऐसे हैं जो वर्षों से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं, जबकि उनसे जूनियर कर्मचारी अन्य जिलों में पदोन्नत हो चुके हैं। यही वजह है कि शिक्षा विभाग के भीतर लगातार असंतोष बढ़ रहा था।
दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा 12 मई 2026 को आयोजित उच्च स्तरीय विभागीय बैठक में यह गंभीर मुद्दा सामने आया था कि प्रदेश के कई जिलों में स्वीकृत पदों, कार्यरत कर्मचारियों और रिक्त पदों के आंकड़ों में भारी अंतर है। कुछ जिलों में रिकॉर्ड पर पद भरे हुए दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर स्कूल शिक्षकविहीन हैं। कहीं कार्यालयों में लिपिकों की भारी कमी है तो कहीं एक ही कर्मचारी कई जिम्मेदारियां संभालने को मजबूर है। इन विसंगतियों ने शासन को भी चौंका दिया।
इसी के बाद DPI ने प्रदेशभर के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिला कार्यालय, विकासखंड शिक्षा कार्यालय और स्कूलों में स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की जानकारी अलग-अलग उपलब्ध कराई जाए। साथ ही संभागीय कार्यालयों का पृथक विवरण भी शासन को भेजना होगा। इसका मतलब साफ है कि अब विभाग हर स्तर की वास्तविक स्थिति जानना चाहता है और केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा।
DPI ने 1 अप्रैल 2025 की स्थिति में सभी संवर्गों की पदक्रम सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। इसमें शिक्षक, प्रधान पाठक प्राथमिक शाला, प्रधान पाठक माध्यमिक शाला और लिपिक वर्गीय संवर्ग शामिल हैं। विभाग ने कहा है कि पदोन्नति प्रक्रिया में शैक्षिक योग्यता, दिव्यांग आरक्षण और वर्तमान जिलेवार आरक्षण रोस्टर का कड़ाई से पालन किया जाए। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि अब नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से प्रमोशन देने की गुंजाइश कम होगी।
सबसे ज्यादा सख्ती यू-डाइस डाटा को लेकर दिखाई गई है। DPI ने साफ कहा है कि जो जानकारी शासन को भेजी जाएगी वह यू-डाइस डाटा से अलग नहीं होनी चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को पहले यू-डाइस डाटा अपडेट करने और उसके बाद ही रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कई जिलों में वर्षों से डाटा अपडेट नहीं किया गया था, जिससे वास्तविक रिक्तियों और पदस्थ कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। अब इस गड़बड़ी पर भी विभाग की नजर टिकी हुई है।
विभाग ने ई और टी संवर्ग की जानकारी अलग-अलग देने को कहा है। इससे यह साफ हो गया है कि शासन अब संवर्गवार वास्तविक स्थिति का विश्लेषण कर बड़े स्तर पर प्रशासनिक निर्णय लेने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में व्यापक स्तर पर पदस्थापना, पदोन्नति और रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सबसे अहम और सख्त निर्देश पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर दिए गए हैं। DPI ने दो टूक शब्दों में कहा है कि 30 जून 2026 तक सभी लंबित पदोन्नति प्रकरणों का निराकरण अनिवार्य रूप से किया जाए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्तर पर प्रमोशन की फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए। यानी अब वर्षों से लंबित मामलों पर बैठकर समय काटने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होना लगभग तय माना जा रहा है।
शिक्षक संगठनों ने भी इस आदेश को महत्वपूर्ण कदम बताया है। लंबे समय से शिक्षक संगठन आरोप लगाते रहे हैं कि विभागीय लापरवाही और आंकड़ों की गड़बड़ी के कारण पात्र कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही थी। कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच गए लेकिन उन्हें उनका वैधानिक प्रमोशन तक नहीं मिला। ऐसे में DPI का यह आदेश लाखों कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है।
हालांकि विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अब वास्तविक स्थिति सामने आने पर कई जिलों में बड़ी प्रशासनिक लापरवाही उजागर हो सकती है। यदि आंकड़ों में गड़बड़ी या जानबूझकर जानकारी छिपाने के मामले सामने आए, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है। क्योंकि इस बार आदेश केवल औपचारिक नहीं बल्कि समय-सीमा और जवाबदेही के साथ जारी किया गया है।
प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण स्कूलों में वर्षों से शिक्षक कमी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, जबकि कार्यालयों में भी कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि रिक्त पदों का सही आकलन सामने आता है और पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी आदेश केवल कागजों तक सीमित रहेगा या वास्तव में वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होगी? क्योंकि शिक्षा विभाग में पहले भी कई बार समय-सीमा तय हुई, लेकिन फाइलें कार्यालयों में घूमती रह गईं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार DPI ने सीधे सख्त चेतावनी के साथ आदेश जारी किया है और शासन की नजर पूरे मामले पर टिकी हुई है।
यदि आदेश का ईमानदारी से पालन हुआ, तो प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों को लंबे इंतजार के बाद प्रमोशन का लाभ मिल सकता है। वहीं यदि फिर से लापरवाही हुई, तो यह मामला आने वाले समय में बड़ा प्रशासनिक विवाद भी बन सकता है।
















